Savitri Temple & Ropeway: Timings, Ticket Price & Trek Summary
Savitri Mata Temple sits atop Ratnagiri Hill in Pushkar and is open daily from 7:00 AM to 7:00 PM with free temple entry. Visitors can take the 8-minute ropeway cable car (₹150+ return ticket) or hike the 1,000-step stone trail (45–60 minutes). The hilltop offers Pushkar's premier sunrise and sunset panoramic views.
मंदिर का पौराणिक इतिहास और परिचय
पुष्कर नगर के ठीक पश्चिमी छोर पर शान से खड़ी रत्नागिरी पहाड़ी (जिसे स्थानीय स्तर पर रत्नागिरी पर्वत भी कहा जाता है) समुद्र तल से लगभग 750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह ऊँची पहाड़ी पावन सावित्री माता मंदिर का धाम है, जो भगवान ब्रह्मा की ज्येष्ठ पत्नी देवी सावित्री को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा जी के दूसरे विवाह से रुष्ट होकर माता सावित्री इसी एकांत पहाड़ी पर आकर अंतर्ध्यान हो गई थीं और उन्होंने नीचे उतरने से मना कर दिया था।
श्रद्धालुओं के लिए इस दुर्गम पहाड़ी की चढ़ाई करना माता सावित्री के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और तपस्या को दर्शाने का माध्यम है। वहीं पर्यटकों के लिए यह पूरे पुष्कर का सबसे सर्वश्रेष्ठ व्यू-पॉइंट है, जहाँ से पूरा सरोवर, सफ़ेद दीवारों वाला नगर और क्षितिज तक फैला सुनहरा अरावली का मरुस्थल एक फ्रेम में दिखाई देता है।
रत्नागिरी पहाड़ी की चोटी रात के समय 'एस्ट्रोफ़ोटोग्राफ़ी' (तारों के चित्रों) के लिए पूरे राजस्थान में सबसे बेहतरीन पॉइंट्स में से एक है। बिना चाँद वाली रातों में यहाँ से आकाशगंगा (मिल्की वे) मरुस्थल के ऊपर पूरी तरह साफ़ दिखाई देती है। रात के समय ऊपर जाने पर अपने साथ टॉर्च और हल्के गर्म कपड़े ज़रूर रखें, क्योंकि सूर्यास्त के बाद ऊंचाई पर मरुस्थलीय हवाएँ काफी ठंडी हो जाती हैं।
पौराणिक कथा एवं सावित्री-गायत्री का महत्व
देवी सावित्री के सम्मान में पुष्कर की परंपरा यह है कि यहाँ दिन की पहली प्रातःकालीन महाआरती सबसे पहले इसी पहाड़ी पर की जाती है — नीचे मुख्य ब्रह्मा मंदिर में विधि शुरू होने से भी पहले।
सावित्री और गायत्री की पूरी पौराणिक गाथा
पुष्कर के पावन सरोवर के तट पर भगवान ब्रह्मा एक अत्यंत महत्वपूर्ण सृष्टि यज्ञ करने वाले थे। चूँकि उनकी पहली पत्नी देवी सावित्री नियत समय पर नहीं पहुँच पाईं, तब यज्ञ को शुभ मुहूर्त में पूरा करने के लिए एक गोप कन्या को गाय के शरीर से गुजारकर पवित्र किया गया (जिसके कारण उनका नाम गायत्री पड़ा) और ब्रह्मा जी ने उनसे विवाह किया।
सावित्री का शाप और रत्नागिरी पर्वत पर एकांतवास
जब माता सावित्री यज्ञ स्थल पर पहुँचीं और अपने स्थान पर किसी दूसरी महिला को देखा, तब वे अत्यंत क्रोधित हुईं। उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पूरी पृथ्वी पर उनकी पूजा केवल पुष्कर में ही होगी, कहीं और नहीं। यह श्राप देने के बाद, वे सीधे इसी रत्नागिरी पहाड़ी की चोटी पर एकांतवास करने चली गईं और तब से वहीं विराजमान हैं।
पवित्र गर्भगृह के भीतर, देवी सावित्री की मुख्य प्रतिमा के साथ देवी शारदा (सरस्वती) की प्रतिमा स्थापित है।
रोपवे बनाम पैदल ट्रेकिंग मार्ग — एक तुलनात्मक विवरण
रोपवे सफारी: समय महज़ 8 मिनट। हवा में उड़ते हुए केबल कार की खिड़की से दिखने वाले नज़ारे बेहद अद्भुत होते हैं। छोटे बच्चों, परिवारों और बुज़ुर्गों के लिए सबसे आरामदायक विकल्प। यह सुबह 8:00 AM पर खुलता है, इसलिए भोर के सूर्योदय को देखने के लिए उपलब्ध नहीं है। कीमत: ₹180 (दोनों तरफ का टिकट)।
पैदल सीढ़ियों का मार्ग: समय लगभग 45 से 60 मिनट (1,000 से अधिक पक्की पत्थर की सीढ़ियाँ)। यह वास्तविक और पारंपरिक तीर्थयात्रा का अनुभव देता है। आप भोर के अंधेरे में ही चढ़ाई शुरू कर सकते हैं ताकि सूर्योदय से पहले चोटी पर पहुँच सकें। कुछ जगहों पर सीढ़ियाँ काफी खड़ी हैं — इसलिए आरामदायक स्पोर्ट्स जूते ही पहनें। यह पूरी तरह निःशुल्क है।
रोपवे सफारी (केबल कार) की पूरी गाइड
पुष्कर के इस आधुनिक रोपवे (सावित्री माता रोपवे) का संचालन दामोदर रोपवेज़ द्वारा राजस्थान पर्यटन के सहयोग से किया जाता है। केबल कार की यह यात्रा महज़ 8 मिनट में आपको उन ऊँचाइयों तक ले जाती है जहाँ से नगर और सरोवर के ऐसे कोण (कोण) दिखाई देते हैं जो ज़मीन से देखना असंभव है।
- संचालन का समय: सुबह 8:00 AM से रात 8:00 PM तक (अंतिम केबल कार रात 7:45 PM पर चलती है)।
- नियमितता: हर 10-15 मिनट में केबल कार उपलब्ध रहती है। इसके लिए एडवांस बुकिंग की कोई आवश्यकता नहीं है, टिकट काउंटर सीधे बेस स्टेशन पर है।
- क्षमता: एक आधुनिक बंद केबल कार (गोंडोला) में एक बार में 8 यात्री बैठ सकते हैं।
- विशेष सलाह: शाम के समय नगर की चमचमाती लाइटों का शानदार व्यू देखने के लिए रात की आखिरी केबल कार (7:30 PM) की सवारी का अनुभव लें।
पारंपरिक पैदल मार्ग — 1,000 पावन सीढ़ियाँ
सीढ़ियों से चढ़ने का पारंपरिक पक्का मार्ग पुष्कर के पश्चिमी छोर पर स्थित पुराने रंगजी मंदिर के पास से शुरू होता है। पत्थरों से बनी यह घुमावदार सीढ़ियाँ पहाड़ों को काटती हुई ऊपर की ओर जाती हैं, जहाँ रास्ते में छोटे-छोटे विश्राम स्थल और पानी की दुकानें बनी हुई हैं।
- मार्ग की शुरुआत (ट्रेक की शुरुआत): पुराने रंगजी मंदिर के पास से — किसी भी स्थानीय निवासी से मुस्कुराकर पूछें: "सावित्री माता की पैड़ी (सीढ़ियाँ) कहाँ से शुरू होती हैं?"
- दूरी: बेस से चोटी तक लगभग 1.2 किमी का एक तरफ का खड़ी चढ़ाई का मार्ग।
- कठिनाई का स्तर: मध्यम — चढ़ाई का अंतिम एक-तिहाई हिस्सा काफी खड़ा है। पैरों की सुरक्षा के लिए चप्पल या सैंडल पहनकर चढ़ने की गलती न करें।
- पेयजल: अपने साथ कम से कम 500ml पानी की बोतल साथ रखें; चढ़ाई के मुख्य रास्तों के बीच में कोई पक्का वेंडर नहीं है।
- नोट: इस पहाड़ी पर बंदर बहुत अधिक संख्या में सक्रिय रहते हैं। अपने चश्मे, पानी की बोतल और कीमती सामान को अपने बैग में सुरक्षित ज़िप बंद करके रखें और उन्हें खाना न खिलाएं।
सूर्योदय और सूर्यास्त — पहाड़ के जादुई सुनहरे प्रहर
रत्नागिरी पहाड़ी के शिखर पर बना चौड़ा व्यू-प्लेटफ़ॉर्म इस तरह निर्मित है जहाँ से पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाएँ पूरी तरह साफ़ दिखाई देती हैं, जिससे यह पहाड़ सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों के लिए पूरे राजस्थान का सबसे बेस्ट पॉइंट बन जाता है। सुबह की पहली किरण जब नीचे घाटी में जमी धुंध को चीरती हुई सरोवर के नीले जल पर गिरती है, तो पानी पिघले हुए सोने की तरह चमक उठता है। वहीं शाम के समय पूरा मरुस्थलीय आसमान केसरिया, लाल और गहरे सिंदूरी रंगों के महा-कैनवास में बदल जाता है।
भोर का विहंगम सूर्योदय देखने के लिए बेस से अपनी पैदल चढ़ाई सुबह 5:00 AM तक हर हाल में शुरू कर दें (ताकि पहली किरण निकलने से पहले ऊपर पहुँच सकें)। शाम को सूर्यास्त देखने के लिए चोटी पर 5:30 PM तक पहुँच जाएँ — क्योंकि वीकेंड पर छतों के किनारे पर्यटकों से जल्दी भर जाते हैं।
माता सावित्री का पावन मुख्य मंदिर
पहाड़ी के सर्वोच्च शिखर पर बना सफ़ेद संगमरमर का यह सुंदर और शांत सावित्री माता मंदिर देवी सावित्री को उनके ध्यानमग्न और जाग्रत रूप में समर्पित है। यहाँ आने वाले तीर्थयात्री माँ को पारंपरिक लाल चुनरी, नारियल और ताज़े गुलाब के फूल अर्पित करते हैं। मंदिर के मुख्य पुरोहित श्रद्धालुओं के अनुरोध पर सुख-समृद्धि के लिए एक सरल वैदिक रक्षा-सूत्र पूजा भी संपन्न कराते हैं।
- मंदिर में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है। श्रद्धा अनुसार दान मान्य है।
- मुख्य मंदिर के खुले आंगन वाले प्रांगण में प्रवेश से पहले अपने चप्पल-जूते बाहर उतार दें।
- इस मंदिर परिसर में देवी सावित्री के मुख्य मंदिर के साथ ही देवी शारदा (सरस्वती) को समर्पित एक छोटा मंदिर भी है।
दर्शन और यात्रा की मुख्य जानकारी
प्रतिदिन खुला रहता है। दोपहर 12:00 PM से शाम 4:00 PM तक मंदिर के मुख्य गर्भगृह के कपाट बंद रहते हैं, लेकिन शिखर का व्यू-प्लेटफ़ॉर्म पूरे दिन खुला रहता है।
प्रतिदिन सुबह 8:00 AM से शाम 7:00 PM तक (पीक सीजन में रात 8:00 PM तक, तेज़ हवा की स्थिति में संचालन अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है)
एक वयस्क के राउंड ट्रिप (दोनों तरफ) के लिए ₹180
अक्टूबर से मार्च का महीना — इस पावन नगर की यात्रा के लिए सबसे सुखद और मनोहारी मौसम
मुख्य मंदिर में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है






